Karele Ki Kheti In Hindi

karele ki kheti in hindi

Karele Ki Kheti In Hindi

भारत देश में करेले कि खेती बहूत समय करते चले आ रहे है वा अभी भी इसकी खेती की जाती है इसकी खेती मुख्य रूप से ग्रीष्मकालीन मौसम में कि जाती है वा इसके फल का उपयोग को सब्जियों के रूप में किया जाता है

Karele Ki Kheti In Hindi

• खेत की तैयारी
करेले के बीज की बुवाई करने के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी होनी चाहिए। खेत समतल होना चाहिए तथा उसमें जल निकास व्‍यवस्‍था के साथ सिंचाई की समुचित व्‍यवस्‍था भी होनी चाहिए वा गोबर खाद डाल दे
• उन्नतशील किस्म
नयी किस्म पूसा हाईब्रिड -4 ,पूसा 2 मौसमी, कोयम्बूर लौंग, अर्का हरित, कल्याण पुर बारह मासी, हिसार सेलेक्शन, सी 16, पूसा विशेष, फैजाबादी बारह मासी, आर.एच.बी.बी.जी. 4, के.बी.जी.16, पूसा संकर 1, पी.वी.आई.जी. 1.

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• बीज रोपाई की विधि
5-7 किलो ग्राम बीज प्रति हैक्टेयर के हिसाब से सही मात्रा है एक स्थान पर से 2-3 बीज 2.5-5. मि. की गहराई पर बोने चाहिए और बीज बोने से पहले 24 घंटे तक पानी में भिगो लेना चाहिए इससे अंकुरण जल्दी वा अच्छा होता है। करेले की बुवाई 15 फरवरी से 30 फरवरी तथा 15 जुलाई से 30 जुलाई तक करनी चाहिए जिसे आपको अच्छी पैदावार मिल सके आप इसकी रोपाई बीज लगाकर वा पौधे से भी कर सकते है

• खाद का उपयोग
करेले की अच्छी पैदावार के लिए उसमे आर्गनिक खाद, कम्पोस्ट खाद का होना बहुत ज़रूरी है। खेत तैयार करते समय 40-50 क्विंटल गोबर की खाद खेत तैयार करते समय डालें। 125 किलोग्राम अमोनियम सल्फेट या किसान खाद, 150 किलोग्राम सुपरफॉस्फेट तथा 50 किलोग्राम म्युरेट आफ पोटाश तथा फॉलीडाल चूर्ण 3 प्रतिशत 15 किलोग्राम का मिश्रण 500 ग्राम प्रति गड्ढे की दर से बीज बोने से पूर्व मिला लेते हैं। 125 किलोग्राम अमोनियम सल्फेट या अन्य खाद फूल आने के समय पौधों के पास मिट्टी अच्छी तरह से मिला देना चाहिए

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• सिंचाई की विधि
अच्छी पैदावार लेने के समय समय से सिंचाई बहुत जरुरी हैं। फसल की सिंचाई वर्षा पर भी आधारित हैं। समय समय पर करेले की निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए। जब भी खेतो में नमी की कमी हो जए तब खेतों की सिंचाई करें। खरपतवार को खेत से बाहर निकाल दे ताकि फल और फूल ज्यादा मात्रा में लगे

• जलवायू
करेले की अच्छा उत्पादन लेने लिए तापमान भी बहूत जरूरी है न्यूनतम तापमान 20.C तथा अधिकतम तापमान 35- 40.C होना चाहिए

• तुड़ाई का समय
फसल नरम होने पर हि तुड़ाई की जानी चाहिए ज़्यादा दिन फसल को रखने पर कठोर हो जाती हैं रोपाई के 70-90 दिन बाद तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती हैं। फसल की तुड़ाई हफ्ते में 2 से 3 बार करते रहना चाहिए

• करेला की फसल में मुजैक रोग लगा है यह एक वायरस है। इस रोग में पत्तियां सिकुड़ जाती हैं और सफेद मक्खी इस वायरस को एक से दूसरे और उससे तीसरे पौधे पर बैठकर सारी फसल को प्रभावित कर देती हैं। इस रोग के लगते ही 20-25 दिनों के अंदर ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करना चाहिए

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