Murgi Palan In Hindi I Desi Murgi I Poultry In Hindi

Murgi Palan In Hindi

मित्रो एव किसान भाइयो हम आज आपको बतायगे मुर्गी पालन से जुड़ा इतिहास एव मुर्गी पालन की सरल और आसान विधि के बारे हिंदी में अतः पूरी पोस्ट जरूर पड़े

भारत देश में मुर्गी पालन का इतिहास बहूत समय से रहा है भारत विश्व में अंडा उत्पादन में तीसरा स्थान मै है लेयर ओर बायलर उत्पादन में छाटवा स्थान पर है वर्ष 1990-97 में अंडा उत्पादन 21 मिलियन था वर्ष 2006-07 में बढ़कर 51 मिलियन ही गया और वर्ष 2013-14 में अंडा उत्पादन 74.75 विलियन रिकॉर्ड की गई और ग्रामीण क्षेत्र में यह व्यवसाय आज भी तेजी से आगे जा रहा है यह व्यवसाय काम लागत में अधिक मुनाफा देता है आप कृषि के साथ साथ इस व्यवसाय को कर सकते हो

केंद्रीय चिड़िया अनुसंधान संस्थान इज्जत नगर की अन्य संस्था जो पक्षियों की प्रजाति के विकास व उत्पादन के लिए कार्य कर रही है
• Regional cooperative marketing Foundation
• national cooperative for egg
• standing committee on poultry development
• Central poultry development advisory committee
• Hall India association of poultry industry

Murgi Palan In Hindi

मुर्गी की उन्नतशिल प्रजातियां

1.असील-इसका वजन 20 सप्ताह में लगभग 1220 ग्राम होता है इसका वार्षिक अंडा उत्पादन 96 अंडे के करीब है 40 सप्ताह में अंडे का वजन 50 ग्राम होता है यह नस्ल उत्तर प्रदेश आंध्र प्रदेश और राजस्थान के लिए सबसे अच्छी नस्ल है

  1. कड़कनाथ
    इसका वजन 20 सप्ताह में 920 ग्राम होता है वार्षिक उत्पादन 105 अंडे होता है वह 40 सप्ताह में अंडे का वजन 40 ग्राम होता है या नस्ल मध्यप्रदेश के लिए सबसे अच्छी है
  2. नेकेड नैक
    इसका वजन 20 सप्ताह में 105 ग्राम होता है इसका अंडा उत्पादन 110 अंडे व 40 सप्ताह में अंडे का वजन 40 ग्राम के करीब होता है
  3. ग्रमपुरिया
    ये 140 से 145 दिनों में अंडा देना शुरू करती है 50% अंडे 61से 70 दिनों में उत्पादन करती है सबसे ज्यादा अंडे 185 -195 दिनों में होता है
  4. ब्रॆसे
    इसका वजन 3 – 3.5 किलो के करीब होता है वह विकसित होने में समय 16-20 सप्ताह लेती है इसका रंग काला पूरा सफेद होता है
    6.जर्सी जायंत
    इसका वजन 3 से 5.5 किलो तक होता है इसका विकसित होने में 16 से 21 सप्ताह लगते हैं बढ़ाने में अधिक समय लगता है इसका रंग काला सफेद होता है
    7.ओरपिगटन
    इसका वजन 4 से 4.5 किलो तक होता है इसका विकसित होने पर 18 से 24 सप्ताह रखते हैं वह अधिक अंडे देने वाली होती है और विकसित होने में अधिक समय लगता है
  5. कोर्निश क्रश
    इसका वजन 5 से 5.5 किलो तक होता है विकसित होने में 4 से 6 सप्ताह लगते हैं तेज वृद्धि करती है वह खाना अधिक खाती है
  6. श्रीनिधी

मुर्गियों के लिए ग्रह व्यवस्था

हमारे देश में खुले किनारे वाले मुर्गीघर अधिक प्रचलित है ऐसे घरों में केवल छते होती है तथा अगल बगल खुला रखा जाता है समानता गर्मी वाले क्षेत्र में मुर्गी घर की लंबाई पूरब पश्चिम दिशा में रखी जाती है जिससे खुले हुए किनारे उत्तर दक्षिण दिशा की ओर होते हैं इससे मुर्गी घर में कम से कम धूप अंदर प्रवेश करती है इसके विपरीत ठंडे स्थानों में मुर्गी ऐसे तरीके से बनाए जाते हैं ताकि अधिकाधिक धूप घर के अंदर प्रवेश करें सके
*कुकुट शाला बनते समय निम्न बातों का ध्यान जरूर दे

  1. उच्च स्थान का चुनवा करे ताकि जल का जमाव ना हो जल निकास की सुविधा अच्छी हो
  2. गांओ से तोड़ी दूरी में बनना चाहीए ताकि मुर्गी की बीमारियां फैलने से रोक लगती है
  3. बिजली व पानी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए
  4. मल मूत्र सफाई व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए
  5. प्रति मुर्गी पर्याप्त स्थान उपलब्ध होना चाहिए
  6. आधुनिक उपकरणों भी उपलब्ध होना चाहिए
  7. आकस्मिक डिस्पेंसरी व चिकित्सा सुविधाएं होना चाहिए
    8.सूर्य का प्रकाश व रोशनी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए
    कुकूट शाला

मुर्गीशाला का आकार मुर्गियों कि संख्या के अनुसार निर्धारित किया जाता है वैसे मुर्गी शाला का आकार 4m× 2.m.× 1.5 m रखा जाता है इसे अपने अनुसार के आकर का बना सकते हो
कुक्कुट शाला कितने प्रकार की होती है ।

  1. पक्की कुक्कुटशाला – इसमें ईट की दीवार बनाई जाती है वा फर्श में सीमेंट का प्लास्टर किया जाता है शीट जो लोहे के एंगल से फिट करते है छत के नीचे दीवार खुली होती है वा जली लगाया जाता है इस प्रकार के मुर्गीघर मजबूत होते है व हवादार भी होते है इसमें लगभग 1000 हजार मुर्गी पली जा सकती है व ख़र्च भी अधिक लगता है
  2. बॉसो की कुक्कुटशाला
    यदि आपके क्षेत्र में बास ज्यादा होता है तो आप बास से कुक्कुटशाला बना सकते है जिनकी दीवार तथा छत बॉस के बनते है छत घास से बनते है ऐसे घर में 40 से 60 मुर्गा मुर्गी पल सकते है यह निम्न बजट में कर सकते है
  3. मुर्गी आवास
    इसमें आप घर के आसपास खुली जगहें में कर सकते है जिसमे आपको जायदा पैसा खर्च करने की आवश्यकता नहीं होती इस विधि को आप छोटे स्तर में अपना कर घर के पिछवाड़े में मुर्गी पालन कर सकते हो
Murgi Palan In Hindi

मुर्गी को दिए जाने वाले खाद्य पदार्थ

*अनाज
मक्का, गेहूं ,चावल, बाजरा, तथा कम रेशो वाला
जो जई उच्च रेशे की मात्रा आहार में इनकी मात्रा 15% से कम होना चाहिए
• अनाज उपजात
गेहूं का चोकर, चावल का ब्रान
*खलिया
मूंगफली,सरसों,सोयाबीन, सूर्यमुखी, यदि
• मछली का चुरा
40-45% तक प्रोटीन
• चूना एवं सीपी के कंकरी
कैल्सियम के अच्छा

• मुर्गी को भोजन देने की विधि
• दलिया
• दाना
• मिश्रण
• गोलियां के रूप में

मुख्य संक्रामक रोग
रानीखेत
फाऊल पॉक्स (चेचक )
मैरेक्स
हैजा
बर्ड

यह एक ऐसा व्यवसाय है जो काम लागत में अधिक मुनफा देता है जिसे आप कृषि के साथ कर सकते हो और इसे बड़े स्तर से चालू ना कर छोटे पैमाने से शुरू कर सकते है इसकी शुरुआत 20से 40 की यूनिट में करो वा इसको आगे बड़वा दो

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